चतुर्विधं यदेतद्धि रूधिरस्यनिवारणम्। संधानं स्कन्दनं चैव पाचनं दहनं तथा। व्रणंं कषाय:संधत्ते रक्तं स्कन्दयते हिमम्। तथा सम्पाचयेद्भस्म दाह:सङकोचरेत् सिरा:।..(.सु.सू.15/39_40) रूधिर के अतिस्राव को रोकने के लिये संधान ,स्कनदन ,पाचन और दहन ये चार प्रकार के उपाय है। इनमे कषाय रस वाले द्रव्य व्रण का संधान कर रक्त स्राव को रोकते है। हिम पदार्थ रक्त को स्कन्दित करते है। रेशम आदि की भस्म पाचन करती है । दाह कर्म सिराओ का सङकोचन कर रक्त स्राव बंद करता है। This epic scene remind me this shloka from Sushruta Samhita Sutra Sthan......

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Nice & helpful post sir

Excellent post sir

Good post sir

Good observation & finding a link related to ayurveda

Yes sir.... it's our ayurved which is science of life.

Ayurveda must be learned through shlokas , it makes exact sense. Thanks sir, expecting more of such posts.

Wonderful post sir

Wonderful pic presentation with ayurvedic reference

Very Nice update Sir. Thank you for Sharing.

Yess sir......i felt same at dat moment.i cn say wat an excellent ayurvedic part of d scene.

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