आयुर्वेद एक उम्मीद ।

अच्छा समाचार यह कि आयुर्वेद को विश्व स्तरीय शोध संस्थान मिल रहा है।अब आयुष पद्धती चिकित्सा /औषधि को नकारना नहीं जाएगा। दुखद इस लिए कि आजादी के ७० सालों बाद भी हम माडर्न लेबों पर आश्रीत होने के कारण हमारे दावों (शास्त्र व संहिताओं आधारीत ) को नकारा जाता रहा। हालाकी आम जन से विशवाश कम नहीं हुआ। सरकार के इस प्रयास से आ.वेद भविष्य उज्जवल लगता है।आयुष मंत्रालय बधाई का पात्र है। २.दुसरे संस्थान में आयुर्वेद डिप्लोमा कोर्स हेतू केवल 10 सीटें दीगयी हैं ? करता यह आश्चर्य नहीं की इतने बड़े भारत में मात्र दस सीटें ? कहने की जरूरत नही की ये सीटें किस को मिलेंगी ? 3. काम की बात * केवल एक संस्था कयूं ? हिन्दुस्तान के सभी आयुर्वेदिक संस्थाओं को कोर्स करवाना चाहिए।लाखों को रोजगार मुहैया होगा वह आयुष के पग आगे बढ़ेंगे। आप का समर्थन ,सफल विश्वास ।

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श्री डॉ मुद्गल जी सादर अभिवादन आप का कथन सत्य है। किन्तु हम आयुर्वेदिक चिकित्सकों इस का कारण जानना पड़ेगा।

सर प्रणाम। एक बात तो आप को भी माननी पड़ेगी कि मोदी जी विदेशों मैं भी आयुष चिकित्सा का जिक्र करते हैं। रही बात डिप्लोमा की तो अभी सही विवरण पता नहीं है पर एक कहावत है कि " सारा जाता देखीऐ,आधा लीजे बांट " कुछ तो मिल रहा है।
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@Dr. S.k. Mudgal Sir, I'm absolutely agree with you.

Thank you doctor
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