चरक जयंती की शुभकामनाये

चरक जयंती की आप सबको शुभ कामना महर्षि चरक के बारे मे कई सारे लोगों ने अपना मत बताया है,  महर्षि चरक को भगवान शेषनाग का स्वरुप माना जाता हे इसलिए श्रावणमास की शुक्लपक्ष की नागपंचमी को आयुर्वेद के लोग चरक जयंती मनाते हे |  कुछ लोग का कहना है की  बौद्ध धर्म  वेदों का विरोध करता था और इसी क्रम में आयुर्वेद की चिकित्सा का भी विरोध बौद्ध के द्वारा किया गया और यह विरोध इस हद तक बढ़ता चला गया की आयुर्वेद की चिकित्सा लगभग नष्ट हो गई ।वह दौर था जब कोई चिकित्सा करने का प्रयास भी करता था तो उसको प्रशासन के द्वारा राज्य शासन के द्वारा प्रताड़ित भी किया जाता था। ऐसे हालात में आयुर्वेद के गुरुकुल,   गुरु , चिकित्सक  धीरे-धीरे मृत प्राय होने लगे और लगभग अशोक से लेकर डेढ़सौ ईसा पूर्व तक का यह जो 100 वर्षों का समय रहा लगभग यह पूरे देश के अंदर चिकित्सा के नाश  होने का समय माना जाता है।      तब भगवान शेषनाग स्वयं इस धरती पर विचरण करते हुए आये और उन्होंने देखा कि जनता कितने कष्ट में है इतनी दुखी है।उनका हृदय द्रवित हो गया, करुणा से भर उठे और उन्होंने कपिष्ठल नामक गाँव जो  कश्मीर में पुंछ के पास स्थित गांव है, वहां पर वेद वेदांग नामक एक वैदिक ब्राह्मण के घर में श्रावण शुक्ल नाग पंचमी के दिन जन्म लिया।     इस कारण से महर्षि चरक के जन्मदिन को हम श्रावण शुक्ल पंचमी नाग पंचमी बनाते हैं।महर्षि चरक ने वेद उपनिषदों का अध्ययन करने के उपरांत आयुर्वेद का अध्ययन प्रारंभ किया।    उन्होंने महर्षि पुनर्वसु आत्रेय के द्वारा उपदिष्ट और आचार्य अग्निवेश के द्वारा प्रणीत लिखित ग्रंथ अग्निवेश तंत्र को खोजा। उसके छिन्न-भिन्न अंशों को सहेजा सम्हाल।जो बड़ी मुश्किल से उनको प्राप्त हुए और उस ग्रंथ को अग्निवेश तंत्र को जो कि पूर्ण नहीं था उस समय उसको धीरे-धीरे करके लेखन कार्य प्रारंभ किया। औषधियों का चयन करना, औषधियों के बारे में खोजना,उनका प्रयोग किया। इस प्रकार से चरक संहिता का वर्णन लिखना प्रारंभ किया।अग्निवेश तन्त्र का प्रतिसंस्करण किया। उन्होंने बताया इस प्रकार से रसायनों के माध्यम से मानव जीवन रोग रहित हो सकता है। च्यवनप्राश के निर्माण की विधि जो लगभग भूली जा चुकी थी उन्होंने पुनः स्थापित की।यह विश्व का सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला एक रसायन और टॉनिक है। इसी प्रकार से ज्वरों का निदान,भेद,सम्प्राप्ति और चिकित्सा का वर्णन है। आज वर्तमान में जितने भी वायरल फ्लू,मलेरिया, फीवर टाइफाइड आदि फीवर हैं उनकी चिकित्सा का वर्णन किया। रक्तपित्त,प्रमेह,कुष्ठ, मानस रोग, पीलिया, जलोदर, अर्श,अनीमिया,अस्थमा आदि रोगों की चिकित्सा बतायी।सबसे महत्व की बात चिकित्सा स्थान में उन्होंने चिकित्सा सिद्धांत दिए। वह अपने आप में अप्रतिम कार्य था । हम सब उनके उपकार को कभी नई भूल सकते  | ऐसे महर्षि का जन्म, भगवान के तुल्य ऐसे सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक का जन्मदिन मनाना हम चिकित्सकों का ही नहीं इस मानव जाति का परम कर्तव्य है | प्रणाम करते हे ऐसे महर्षि चरक को.. जय आयुर्वेद।

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चरकसंहिता आयुर्वेद में प्रसिद्ध है। इसके उपदेशक अत्रिपुत्र पुनर्वसु, ग्रंथकर्ता अग्निवेश और प्रतिसंस्कारक चरक हैं।

Thank you doctor
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charak ji. ki. jai ho....... aapki. kripa. hm. sabhi. Ayurved chikitsko pr hmesha bani rahe...

Thank you doctor
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Tq u for sharing this good information with us...

Thank you doctor
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Thanks for sharing this information.

Thank you doctor
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Thanks and same to u Dr. Sahab

Thank you doctor
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आपको भी अनेक शुभकामनाएं

Thank you doctor
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Good information

Thank you doctor
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