हिंदुस्तान में प्रचलित प्रमुख चिकित्सा पद्धतियां है. 1एलोपैथी(MBBS) 2 आयुर्वेद(BAMS) 3 होमियोपै

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हिंदुस्तान में प्रचलित प्रमुख चिकित्सा पद्धतियां है. 1एलोपैथी(MBBS) 2 आयुर्वेद(BAMS) 3 होमियोपैथी(BHMS) 4 यूनानी(BUMS) चारों पद्धतियों के अलग अलग सिद्धांत हैं व अलग सिलेबस हैं अलग महाविद्यालय हैं, पर सबकी ग्रेजुएशन कोर्स की अवधि साढ़े पाँच साल है,सामान्यतः इसमें 6 साल ही पूरे लग जाते हैं। सबके एडमिशन के लिये एक कॉमन Entrence Exam है विद्यार्थियों को अपनी रैंक व पसन्द के अनुसार उसे चुनना होता हैं। इसी प्रकार सबके पोस्ट ग्रेजुएशन के कोर्स सामान्यतः 3 वर्ष के हैं जिसका Enterence Test पूर्णतयः सामान्यतः अलग हैं। इसके अलावा हर Pathy के सुपर स्पेशलाइज्ड कोर्स व डिप्लोमा अलग अलग अवधि के हैं। सारी पद्धतियां अपने आप में सम्पूर्ण चिकित्सा पद्धति है,परंतु हर रोग का इलाज हर पैथी में नहीं है हर पैथी की अपनी सीमाएं हैं। हर व्यक्ति के शरीर की प्रकृति अलग है हर रोग से लड़ने की क्षमता अलग अलग है,वह अपने जीवन के अनुभव से स्वयं निर्णय कर सकता है कि उसे किस पैथी की दवा लेनी है,सामान्यतः वह ऐसा ही करता है,परंतु कभी कभी चिकित्सक ही सही बात नहीं बताता है। हर पैथी के चिकित्सक का यह दायित्व है कि वह अपनी सीमाओं को जाने,स्वीकार करे व रोगी के हित में उसे बताएं। समस्या स्वयं को सर्वज्ञ मानने पर ही होती है। इसीलिए सबसे निवेदन है कि हर डिग्री धारी चिकित्सक ने कम से कम 6 साल अपनी पढ़ाई में लगाये हैं उसका सम्मान करें व उचित फीस देकर उसकी सलाह लें वरना नुकसान आप ही उठाएंगे। जब किसी की सलाह मुफ्त नहीं है तो किसी भी पैथी के चिकित्सक की सलाह भी मुफ्त न लें ।और जो आप फ्री के चक्कर में,अखबार,TV, सोशल मीडिया,गूगल ,मेडिकल स्टोर,दवा निर्माता, व्यापारी की सलाह के साथ , हजारों रुपये की दवा खरीदते हैं ,अंततः आपका ही नुकसान है इन्हीं फ्री की सलाह के चक्कर लाखों लोग अपनी स्थिति बिगाड़ लेते हैं चाहे वह डायबिटीज ,ब्लड प्रेशर जैसी बड़ी बीमारी हो या एसिडिटी पेट दर्द जैसी छोटी बीमारी। डॉ अतुल वार्ष्णेय

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