अर्श में अनुपालन भेद (कांकायन वटी)

(Edited)

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Non bleeding piles and constipation की सभी अवस्था में कान्कायन वटी का उपयोग कर सकते हैं । घटक- हरीतकी, पंचकोल, मरिच, जीरा, भल्लातक, यवक क्षार Helpful in non bleeding piles because of chitarak and bhallatak. (Best drug of शुष्क अर्श) Helpful in reduce the size of pilemass due to bhallatak and yavak kshar. Also good appetizer, anticonstipation Not use in pitta prakriti, gastritis, peptic ulcers, fissure in ano, pregnancy and lactation because of bhallatak..
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कांकायन वटी दो प्रकार की बनाई जाती है। 1,,कांकायन वटी।।अर्श।।। 2,,कांकायन वटी।।गुल्म।। अर्श के लिए कांकायन वटी।।अर्श।।2 वटी सुबह शाम छाछ के साथ दे। अर्श रोग की उत्तम औषधि है। इस के प्रयोग से अर्श के मस्से खत्म हो जाते हैं और विबन्ध भी ठीक हो जाता है। अर्श रोग की उत्तम औषधि है।
आचार्य जी संशय भिलावे को लेकर है। दो पित दोष /रोगी यों पर छाछ के साथ ही प्रयोग किया था पर परिणाम यह कि करता बंद नहीं हुआ। क्या यह तथ्य निकलता है कि पित दोष में कांकायन वटी का सेवन नहीं करना चाहिए ? शास्त्रर्थ में ऐसा कोई निर्देश नही मिलता । आप कृपया अपना विचार व्यक्त करें ।अति आभार।@Dr. D. P. Singh Acharya ji.
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In primary stage when patient also have Mandagni, Ajeerna and Vibandha it works great.... @S.k. Mudgal sir
Thank you doctor
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Kankayan vati should give only after proctoscopy it is useful in bleeding and non bleeding piles.
Thank you doctor
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Useful