आम- 4.....

इस post आम दोष की चिकित्सा किस प्रकार की जाएं इसका वर्णन करने की कोशिश करूंगी। आचार्य चरक ने आम दोष की चिकित्सा का वर्णन विमान स्थान के दूसरे अध्याय में इस प्रकार किया है- आमप्रदोषजानां पुन:र्विकाराणामपतर्पणेनैवोपदिश्यते।। आम दोष में दोषों के बल के अनुसार अपतर्पण चिकित्सा (लंघनं, लंघन-पाचन, शोधन) करना चाहिए। अल्प दोष बल- लंघन मध्यम दोष बल-लंघन-पाचन बहु दोष- शोधन मधुकोशकार के अनुसार- सामे पाचनं,निरामे शमनम् इति।। साम दोष-पाचन निराम दोष-शमन अ.हृ.सू.-13 के अनुसार- आम सर्वशरीरगत = शोधन निषिद्ध इस विषय पर अरूणदत्त अपनी टीका में कहते हैं कि- आम सर्वशरीरगत= शोधन निषिद्ध आम एकांगी= शोधन चिकित्सा इस प्रकार सभी आचार्य ने आम दोष की चिकित्सा में अपतर्पण को ही मुख्य माना है,अब यह वैद्य की युक्ति पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार अपतर्पण चिकित्सा का प्रयोग करें।

(Edited)

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Dear Dr. Km Bhawana, I agree with you that in aam dosha अप तर्पणम् प्रशष्यते ।।
Thank you doctor
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