नेत्र रोग के निदान, पूर्वरूप, संप्राप्ति, चिकित्सा

नेत्ररोग के निदान- उष्णाभितप्तस्य जलप्रवेशाद् दूरेक्षणात् स्वप्नविपयर्याच्च...... सु.उ. 1/26-26 1- उष्णता से अभितप्त हो जल में प्रवेश करना ( बाहर धूप में रहने के पश्चात तुरंत स्नान करना) 2-दूर की वस्तुओं को अधिक देखना( ऐसा करने से eyes में straining होती है) 3- दिन में सोना और रात्रि में जागरण करना 5-निरंतर रोते रहना 6- अम्ल चीजों का अधिक सेवन करना 7- कुल्तथ, उड़द आदि कफकारक पदार्थो का सेवन करना 8- अश्रु आदि के वेग का धारण करना 9- वमन का अतियोग होना 10- बहुत सूक्ष्म वस्तुओं का निरीक्षण करना (घड़ी आदि ठीक करने वाले) पूर्वरूप- वतर्मकोषेषु शूकपूर्णाभमेव.... सु.उ.1/21-23 1-foregin body sensation in the eyes 2-frequent lacrimation 3- pain 4- redness etc. संप्राप्ति- सिराऽनुसारिभिर्दोषेविगुणैरूध्वमागतै: जायन्ते नेत्रभागेषु रोगा: परमदारूणा:।। सु.उ.1/20 निदान सेवन=दोष प्रकोप = प्रकुपित दोष द्वारा सिराओं का अनुसरण करते हुए शरीर के ऊर्धव भाग में आकर= नेत्र के अलग अलग भागों में नेत्ररोग की उत्पत्ति करना। चिकित्सा- संक्षेपतो क्रियायोगो निदान परिवर्जनम् वातादीनां प्रतीघात:.... सु.उ.1/25 निदान परिवर्जन वातादि दोष का प्रतिकार। @#cap Admin Ayurveda

(Edited)

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