ज्वर( jwara)

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि रसवह स्रोतस में संड्ग (blockage) होने के कारण ही ज्वर की उत्पत्ति होती है। इसलिए ज्वर की संप्राप्ति को समझने और ज्वर की संप्राप्ति का विघटन करने के लिए हमें रसवह स्रोतस के मूल, उसकी दुष्टि के हेतु,लक्षण और सामान्य चिकित्सा का ज्ञान होना आवश्यक है। मूल- रसवहानां स्रोतसां हृदयं मूलं दश च धम्नय: ।। मूल- हृदय+10 धमनियां दुष्टि के हेतु- गुरूशीतमतिस्निगधमतिमात्रं समश्चताम। रसवाहिनी दुष्यन्ति चिन्त्यानां चातिचिन्तनात्।। 1-excessive intake of guru ahara like buffalo milk,paneer,non veg. 2- excessive intake of cold drinks nd food which are sheet in nature 3- excessive intake of deep fry food,oily food 4- eating a lot of food after a short period of time. 6- thinking of logical nd illogical things again nd again. रसवहस्रोतो दुष्टि लक्षण- loss of taste loss of appetite heaviness in body blockage of shrotas impotency loss of digestive power early ageing early greying of hairs pandu jwara चिकित्सा- रसजानां विकाराणां सर्वलंघनमौधम्। सभी प्रकार का लंघन (शोधन+शमन) रसज विकारों की चिकित्सा है। reference- चरक विमान-5 चरक सूत्र -28

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Dear Dr. Km Bhawana, Rasvah Srotodusti Laxana nice work.
Thank you doctor
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