अर्श रोग विवेचना एवं चिकित्सा

अर्श रोग विवेचना एवं अनुभूत चिकित्सा आज मैं आपसे अर्श पर चर्चा कर रहा हूं। अर्श की निरुक्ति,,,अरिवत्प्राणान् शृणाति इति अर्श।। शत्रू के समान जो प्राणों को कष्ट करें, उसे अर्श कहते हैं। अर्श गुदा स्थान में होने वाला एक रोग है, आयुर्वेद में अर्श का व्यापक अर्थ है। चरक के अनुसार,, अर्शासीत्यधिमांविकाराह्।अर्श अधिमांस विकार है, अर्थात अर्श मांस में ही अधिष्ठात है, इस प्रकार मूत्रेन्द्रिय, योनि गला मुख,नासिका,कर्ण, नेत्रों के वत्र्भ और त्वचा स्थान भी अधिमांस के क्षेत्र है। इन में उत्पन्न होने वाले मांसांन्कुर को अर्श कहते हैं। आचार्य चरक ने गुदा में उत्पन्न मांसांकुर को ही अर्श माना है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान गुदा में होने वाले मांसांन्कुर को ही अर्श Haemorrhoids or Piles तथा किसी अंग में होने वाले मांसांन्कुर को पोलिप्स कहते हैं। यहां पर हम गुदा में होने वाले मांसांन्कुर को अर्श कहेंगे। आयुर्वेदिय मनीषियों के अनुसार जब वातादि दोष कुपित होता है तब त्वचा मांस और मेद को दूषित करते हैं और परिणामस्वरूप गुदा के आसपास किनारे पर अथवा मल द्दार के अभ्यान्तर नाना प्रकार की आकृति वाले मांसांन्कुर उत्पन्न हो जाते है, जिन्हें अर्श मस्से बवासीर कहते हैं। दोषस्त्वम् मासां मेदांसि संदूष्य विविधाकृतीन। मांसांकुरान पानादौ कुर्वन्त्यर्शासि तांजगुह्।। अर्श का अधिष्ठान गुदा होने से गुदा की संरचना संक्षिप्त में समझ लें तो आसानी होगी। सुश्रुत निदान स्थान के द्वितीय अध्याय के अनुसार सथूलान्त्र के आखिरी भाग के साथ संयुक्त अर्धांगुल सहित पांच अर्थात सवा चार अंगुल की गुदा होती है। उसमे डेढ़ डेढ़ अंगुल की तीन बलिया होती है। 1,,प्रवाहणी,,,मल का प्रवाहण करने वाली। 2,,विसर्जनी,,, गुदा का विस्फारण करने वाली। 3,,संवरणी,,, गुदा के चारों ओर से गुदा को संकोच करने वाली,गुदोष्ठ से एक अंगुल पर आधुनिक प्रत्यक्ष शरीर के अनुसार साढ़े चार अंगुल गुदा के निम्न भाग हैं,,, 1 गुदौष्ठ Anus 2 गुदनलिका Anal Cannal 3 मलाशय Rectum । मलाशय का आखिरी इंच भर हिस्से को जिसमें अर्थात छल्ले झुर्रियां या सलवटें हुस्टन वाल्व Houston Valves कहते हैं। शारीरिक श्रम न करना, गरिष्ट पदार्थ का सेवन करना,मिर्च मसाला,चट पटी वस्तु का अधिक सेवन करना, अधिक आराम से बैठे रहना, अधिक मात्रा में शराब पीना,कब्ज की अधिकतर शिकायत रहना, रात्रि जागरण, यकृत की विकृतियां,स्त्रियों में गर्भ च्युति होना, वृद्धावस्था में प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ जाने पर,चाय अधिक सेवन करने से, साईकिल की अधिक सवारी करने से,अर्श रोग के प्रधान हेतु हैं। शेष गौरांग से आगे,,,,,,,

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Very informative post Dr.
Thank you doctor
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बवासीर या पाइल्स या (Hemorrhoid / पाइल्स या मूलव्याधि) एक ख़तरनाक बीमारी है। बवासीर 2 प्रकार की होती है। आम भाषा में इसको खूनी और बादी बवासीर के नाम से जाना जाता है। कहीं पर इसे महेशी के नाम से जाना जाता है।
Thank you doctor
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बहुत लाभदायक जानकारी.... अपने अनुभव के साथ चिकित्सा सूत्र का भी उल्लेख करे जो मेरी तरह नए चिकित्सकों के लिए अत्यंत लाभकारी होगा @Dr. D.p Singh sir
Thank you doctor
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Lot of thanks sir for this post like refresher coarse. I like it keep it up. Once again lot of thanks.
Thank you doctor
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बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी है सर जी ।। धन्यवाद ।।।
Thank you doctor
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बहुत लाभदायक जानकारी।अगली पोस्ट का इन्तजार रहेगा।
Thank you doctor
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Nice update thanks for sharing Dr D.P.Singhji
Thank you doctor
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Informative discussion.. Thank you
Thank you doctor
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Nice information sir... Thanks
Thank you doctor
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Bahot labhadayak dyan sir ji
Thank you doctor
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