विषम ज्वर भेद ?

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शरीर का ताप बढ़ जाने (97-98 डिग्री से अधिक) को ही लोग साधारणत: ज्वर (बुखार) या ‘Fever’ कहते हैं। शरीर के किसी अंग में (या यंत्र में) प्रदाह या किसी तरह का विष रक्त के साथ मिल जाने पर ज्वर की उत्पत्ति हो जाती है। जो ज्वर एक बार छूटकर फिर आ जाता है, उसे ‘सविराम’ या ‘विषम जवर’ कहते हैं।

Thank you doctor
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SUGGESTIVE. OF ... MALARIA.. FEVER. ON. .. ..EVERY. OTHER. DAY... ..... ALTERNATE. DAYS.. AND GENERALLY. APPROXIMATELY .. ..ON. A. FIXED. TIME..

Lot of tnx.Dr.Dinesh Gupta ji.
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शरीर का ताप बढ़ जाने (97-98 डिग्री से अधिक) को ही लोग साधारणत: ज्वर (बुखार) या ‘Fever’ कहते हैं। शरीर के किसी अंग में (या यंत्र में) प्रदाह या किसी तरह का विष रक्त के साथ मिल जाने पर ज्वर की उत्पत्ति हो जाती है। जो ज्वर एक बार छूटकर फिर आ जाता है, उसे ‘सविराम’ या ‘विषम जवर’ कहते हैं।

विषम ज्वर --वह ज्वर जिसका रोज,एक दिन छोड़ कर, दो दिन छोड़ कर आता है। जब दोष रक्त धातु,मास धातु या मेद धातु के साथ मिल कर उसको दू षित करके ज्वर की उत्पत्ति होतीं हैं

डा.खरे जी शास्त्र सम्मत परिभाषा से अलग करता यह नहीं मान लिया जाए कि एक ऐसा ज्वर जो बिषम परिस्थितियों को उत्पन करें ? ऐसी औषधियां (जेसे बिषमज्वरान्तक लोह) जो केवल बिषम परिस्थितियों में ही प्रयोग का निर्देशन है ?क्या सनिनपात ज्वर को हमें विषम परिस्थितियों वाला ज्वर मानना चाहिए ? क्यूंकि उपचार में प्रयुक्त औषधियां विषम परिस्थितियों में ही प्रयोग होती है ,जैसे जयमंगल रस आदि ? साधारण ज्वर में प्रयुक्त नहीं किया जाता । मेरा आश्रय इन दोनों के भेद को समझना है न कि अपना कोई नया सिद्धांत रखना ।कृपा अपने विचार रखें। @Dr. D. P. Singh ,@Dr. Suresh Kumar Khare ,@Dr. M.s.b Babu ,@Dr. Nagur Mogal ,@Dr. P. G. Shah ,@Satyanarayana Reddy Sunku ,@Dr.Hament Adikari ji.& Other,respted DOC's.
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Fever Spike on alternate day.??

Thank you doctor
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डॉ मुद्गल जी का कथन सत्य है।

Thank you doctor
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विषम ज्वर पांच प्रकार का होता है 1 सतत 2सन्तत 3 अन्येधुष्क 4 तृतीयक 5 चतुर्थक

Thank you doctor
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Y liver problam h ok ho jatta h

Thank you doctor
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