डिफ्थीरिया - Diphtheria

- इस रोग में गले की श्लैष्मिक - झिल्ली में एक प्रकार का सफेद - सा पर्दा - सा बन जाता है जिससे रोगी को साँस लेने , खाने - पीने , कुछ भी निगलने आदि में कष्ट होता है । गले की गाँठे भी बढ़ सकती हैं । रोग बढ़ने पर तेज बुखार , उल्टी - दस्त , बेचैनी आदि लक्षण भी उत्पन्न हो जाते हैं । • फाइटोलक्का Q - 2 बुंद , एपिस मेल Q - 3 बुंद , लैक कैनाइनम 6-1 बूंद , नैजा 30-1 बूंद , मर्क सियानेटस 6-2 बूंद , काली फ्लोरिकम 3X - 2 ग्रेन , एक्वा -1 औस । इन्हें मिला लें । यह एक मात्रा है । इस प्रकार प्रतिदिन चार बार देने से लाभ होता है ।

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उपयोगी एवं महत्त्वपूर्ण जानकारी हेतु आभार व्यक्त करता हूं।

Thank you doctor
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Madanfruit killai ullti hoggo

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