आम -3.....

पहली 2 post में आम की उत्पत्ति,साम,निराम दोषों के लक्षण का वर्णन करने के बाद आज की post में साम तथा निराम दोषों की अवस्था का परीक्षण कैसे किया जाए इसका वर्णन करूंगी। संहिताओं में हमें साम तथा निराम दोषों की अवस्था का परीक्षण मल परीक्षा के द्वारा करने का निर्देश मिलता है। आचार्य चरक ने ग्रहणी चिकित्सा अध्याय 15 में मल परीक्षा का वर्णन करते हुए कहा है- " मज्जयत्यामा गुरूत्वाद्विट् पक्वा तूत्पल्वते जले..।।" 1-आम मल=गरू=जल में डूब जाता है। 2- निराम मल=पक्व= जल में तैरता है। सुश्रुत उत्तरार्द्ध 40/7 के अनुसार- 1- आमयुक्त मल जल में डूबने वाला,भृशदुर्गन्धि(अत्यंत र्दुगंधयुक्त),विछिन्न(poorly formed) होता है। 2-निराम मल जल में तैरने वाला,दुर्गन्ध रहित,अपिच्छिल(non sticky) होता है। माधवकार ने विछिन्न के स्थान में पिच्छिलम् लिखा है और मल के आम दोष से युक्त होने पर मल का चिकना/चिपचिपा/sticky होना बताया है।stick होने के कारण आम दोष से युक्त मल toilet seat में चिपक जाता है। इसके अलावा जिह्वा परीक्षा के द्वारा भी आम निराम दोष की अवस्था का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। साम दोष=coated tongue/White tongue निराम दोष=non coated tongue/red tongue.

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Dear Dr. Km Bhawana, Saam Niraam dosha parikshana is informative.
Thank you doctor
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