some basic definition

अभिष्यंदी- जो द्रव्य रसवह स्रोतसों का अवरोध कर शरीर में गुरूता उत्पन्न करें।यथा- दधि प्रमाथी- जो द्रव्य अपनी रस-रक्तवाही स्रोतसो में संचित दोष को दूर करें। यथा-मरीच त्रिकटु- सौंठ+मरीच+पिप्प्पली त्रिजात- दालचीनी+तेजपत्र+एला क्षारत्रय- यवक्षार+सज्जीक्षार+सुहागा

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Dear Dr. Km Bhawana, द्रव्य व गुण व्याख्या : अति सुन्दरम् ।

Thank you doctor
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