रक्तपित व्याख्या एव चिकित्सा

रक्तम् च् पित्तम् च् ईती रक्त्पित्तम्। अर्थात पित रक्त के साथ मिलकर रक्त्पित्त रोग उतप्पन्न् करता है। दोष - पित्त दुश्य - रक्त अधिस्ठान- उधर्वमार्ग- नासिका, कर्ण, नेत्र, मुख, अधोमार्ग- उपस्थ, योनि, गूद। उभयमार्ग- रोमकुप भेद - वातज रक्त्पित् पित्तज् रक्तपित्त्। कफज रक्तपित्त। रक्त पित्त कि गति - उधर्व गति।- ऊपर के स्त्रोतो से आधो गति- नीचे के स्त्रोतो से उभयमार्ग- दोनों से एक साथ। आन्तिकी गति- सभी रोमकुपो एव छ्हिद्रो से। सध्यसध्य्ता -उधर्वमार्ग - साध्य अधोमार्ग- याप्य उभयमार्ग- असाध्य Diagnosis अत्यधिक पित्त वर्धक आहार विहार जैसे उश्न् तिक्शन् कटु पदार्थ अम्ल पदार्थ, अत्यधिक लवण, धूप, विदाहकारक पदार्थो के सेवन से पित्त प्रकुपित हो जाता है। जब यह प्रकुपित् पित्त रक्त के साथ मिलता है तो रक्त को भी दूशित् कर देता है, जिससे रक्त दूषित होकर शरीर से बाहर निकलता है जिसे रक्त पित्त कहते है।पित्त के रक्त के साथ मिलने पर रक्त से गंध एव वर्ण भी पित्त के सामान हि आती है। Management 1- प्रतिमार्गहरण - अर्थात विपरीत मार्ग से दोष को निकालने का सिद्धांत - जैसे अधोमार्ग से विरेचन देना और विरेचन श्रेष्ठ पित्तशामक हैं एव उधर्व रक्तपित्त मे जो कफ का अनुबंध होता है वह। भी दूर हो जाता है। इसीलिए उधर्व को साध्य कहा गया है। किरातिक्त पेया - चिरायता, खश, नागर्मोथा डालकर पकाये जल मे पेया पिलाये। 3- लाल चन्दन खश लोध्र सोंठ डालकर पकाये जल मे पेया पिलाये। 4- रक्तपित्त् नाशक योग खैर, फूलप्रियङु, कचनार, सेमर के फूलो का चुरन मधु के साथ रक्तपित्त् रोगी को खिलाये। मुत्रमार्गी रक्तपित्त योग शतावर और गोखरु डालकर पकाया हुआ दूध या चार पर्नियो मे (शाल्पर्नी, प्रश्निपर्नी,मुदगपर्नी, माश्पर्नी) मे पकाया गया दूध रक्तपित्त् को शीघ्र शांत कर देता हैं। गुदामार्गी रक्तपित्त योग। मोचरस का कल्क डालकर पकाया गया दूध शानदार लाभ करता है या सुगंधबाला, नीलकमल,सोंठ डालकर पकाया गया दूध उत्तम लाभ्प्रद् है। अन्य अनुभूत योग वासाघृत- इससे शीघ्र हि रक्तपित्त शांत होता हैं। शतवरी घ्रित- यह घृत कास, ज्वर्, आनाह, विबन्ध, रक्तपित्त को नष्ट करता हैं। नसगत रक्तपित्त मे स्तम्भक योग मुनक्का के रस का नस्य दे दूध का नस्य दे। दूब के रस का नस्य दे। प्याज के रस का नस्य दे। रक्तपित्त नाशक विहार शीतल धारागृह, शीतल जलपान, गले मे तुलसी कि माला, रेशमी वस्त्र, धन्यावाद।।

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50 वर्ष पूर्व किया गया अध्ययन को दुबारा से याद दिलाने के लिए आभार व्यक्त करता हूं।

Thank you doctor
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Valuable information and suggestions thanks to Dr Aazad Kumar

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Useful

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