संधिवात (संधिगत वात)

संधिवात हन्ति संधिगत: सन्धीश्च शूलाटोपौ करोति च।। वह व्याधि संधियों को नष्ट कर,संधियों में शूल व आटोप उत्पन्न करती है उसे संधिवात कहते हैं। संप्राप्ति- वात प्रकोपक निदान सेवन से=वात का प्रकोप=प्रकुपित वात दोष का संधियों में स्थान संश्रय=संधि,स्नायु, कंडरा की विकृति कर संधियों में शूल+आटोप के साथ= संधिवात की उत्पत्ति करना संप्राप्ति घटक- दोष- वात दूष्य-रस रक्त अस्थि स्रोतस- अस्थि मज्जावह स्रोतों दुष्टि- संग,विमार्गगमन अधिष्ठान- अस्थि, संधि साध्यासाध्यता- कृच्छसाध्य चिकित्सा- जानु बस्ति जानु धारा

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Dear Dr. Km Bhwana, Sandhi vat and chikitsa is useful.
Thank you doctor
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