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रोगी यकृतशोथ एवं वृकाश्मरी से पीड़ित है। चिकित्सा संबंधी योग ,,,,, पाषाणभेद मकोय पंचांग शाहतरा कासनी बीज पुनर्नवा गिलोय वरुण छाल गोखरू छोटा प्रत्येक 8 ग्राम लेकर काढ़ा बनाकर उसमें 2 ग्राम हजरलयहुद भस्म मिलाकर सुबह-शाम सेवन कराएं। यकृत दारी लौह 4 रत्ती ताप्तयादि लौह 4 रत्ती सत गिलोय 4 रत्ती शहद में मिलाकर सुबह-शाम सेवन कराएं। कुमारियासव द्राक्षासव दोनों को मिलाकर 25 ग्राम सुबह-शाम खाने के बाद दें। निश्चित रूप से लाभ होगा। योग परिक्षित है। पिछले 40 वर्ष से प्रयोग कर रहा हूं।