Pakshaghate Virechanam

As we all know that in our Ayurvedic classics all our great sages agreed with the concept of Pakshaghate Virechanam. As a layman's point of view a doubt regarding this concept arises. The patient is already in weak stage and it is not justifiable to give him virechana as he is almost handicapped due to the illness. Please share your valuable views regarding this topic. Hopefully we get better explanations for this reference.

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पक्षाघात में चरक ने.. 1)स्वेदन स्नेहसयुंक्त पक्षाघाते तू विरेचन | वात दोष प्रधान होने ने के कारण स्नेहयुक्त विरेचन देना का विधान है और विरेचन आमाशय और पक्वाशय दोनों पे काम करता है 2) पक्षाघात में... सिरा स्नायु विशोष्य च | सिरा और स्नायु की दुस्टी होती है जो रक्त की उपधातु है और रक्त - पित के साथ आश्रय आश्रयी भाव सेku सम्बन्धीत. कुर्यात शोणित रोगेषु विरेचन | रक्तधातु और पित दोष के लिए विरेचन best है | 3) पक्षघात में प्राय विबंध होता है इसलिए विरेचन देना का विधान है |

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